परीक्षा में सफलता कैसे पायें?

vidyarthivikassansthan.
परीक्षा में सफलता कैसे पायें?

जैसे-जैसे परीक्षाएँ नज़दीक आने लगती हैं, वैसे-वैसे विद्यार्थी चिंतित व तनावग्रस्त होते जाते हैं, लेकिन विद्यार्थियों को कभी भी चिंतित नहीं होना चाहिए। अपनी मेहनत व भगवत्कृपा पर पूर्ण विश्वास रखकर प्रसन्नचित्त से परीक्षा की तैयारी करनी चाहिए। सफलता अवश्य मिलेगी, ऐसा दृढ़ विश्वास रखना चाहिए।

  1. विद्यार्थी-जीवन में विद्यार्थियों को अपने अध्ययन के साथ-साथ नियमित जप-ध्यान का अभ्यास करना चाहिए। परीक्षा के दिनों में तो दृढ़ आत्मविश्वास के साथ सतर्कता से जप-ध्यान करना चाहिए।

  2. परीक्षा के दिनों में प्रसन्नचित्त होकर पढ़ें, न कि चिंतित रहकर।

  3. रोज सुबह सूर्योदय के समय खाली पेट तुलसी के 5-7 पत्ते चबाकर एक गिलास पानी पीने से यादशक्ति बढ़ती है।

  4. सूर्यदेव को मंत्रसहित अर्घ्य देने से यादशक्ति बढ़ती है।

  5. परीक्षा में प्रश्वपत्र (पेपर) हल करने से पूर्व विद्यार्थी को अपने इष्टदेव, भगवान या गुरूदेव का स्मरण अवश्य कर लेना चाहिए।

  6. सर्वप्रथम पूरे प्रश्नपत्र को एकाग्रचित्त होकर पढ़ना चाहिए।

  7. फिर सबसे पहले सरल प्रश्नों का उत्तर लिखना चाहिए।

  8. प्रश्नों के उत्तर सुंदर व स्पष्ट अक्षरों में लिखने चाहिए।

  9. यदि किसी प्रश्न का उत्तर न आये तो घबराए बिना शांतचित्त होकर प्रभु से गुरूदेव से प्रार्थना करें व अंदर दृढ विश्वास रखें कि मुझे इस प्रश्न का उत्तर भी आ जाएगा। अंदर से निर्भय रहें एवं भगवदस्मरण करके एकाध मिनट शांत हो जाएं। फिर लिखना शुरू करें। धीरे-धीरे उन प्रश्नों के उत्तर भी आ जाएंगे।

  10. देर रात तक न पढ़ें। सुबह जल्दी उठकर, स्नान करके ध्यान करने के पश्चात पढ़ने से जल्दी याद होगा।

  11. सारस्वत्य मंत्र का नियमित जप करने से यादशक्ति में चमत्कारिक लाभ होता है।

  12. भ्रामरी प्राणायाम तथा त्राटक करने से भी एकाग्रता और यादशक्ति बढ़ती है।

  13. vidyarthi vikas sansthan
    परीक्षा में सफलता कैसे पायें?

शिक्षा का क्या अर्थ है ?

शिक्षा का क्या अर्थ है ?

शिक्षा का क्या अर्थ है ?

“गंगा बस उतनी नहीं है, जो ऊपर-ऊपर हमें नज़र आती है। गंगा तो पूरी की पूरी नदी है, शुरू से आखिर तक, जहां से उद्गम होता है, उस जगह से वहां तक, जहां यह सागर से एक हो जाती है। सिर्फ सतह पर जो पानी दीख रहा है, वही गंगा है, यह सोचना तो नासमझी होगी। ठीक इसी तरह से हमारे होने में भी कई चीजें शामिल हैं, और हमारी ईजादें सूझें हमारे अंदाजे विश्वास, पूजा-पाठ, मंत्र-ये सब के सब तो सतह पर ही हैं। इनकी हमें जाँच-परख करनी होगी, और तब इनसे मुक्त हो जाना होगा-इन सबसे, सिर्फ उन एक या दो विचारों, एक या दो विधि-विधानों से ही नहीं, जिन्हें हम पसंद नहीं करते।”

क्या आप स्वयं से यह नहीं पूछते कि आप क्यों पढ़-लिख रहे हैं ? क्या आप जानते है कि आपको शिक्षा क्यों दी जा रही है और इस तरह की शिक्षा का क्या अर्थ है ? अभी की हमारी समझ में शिक्षा का अर्थ है स्कूल जाना पढ़ना लिखना सीखना, परीक्षाएं पास करना कालेज में जाने लगते हैं। वहाँ फिर से कुछ महीनों या कुछ वर्षों तक कठिन परिश्रम करते हैं, परीक्षाएं पास करते हैं और कोई छोटी-मोटी नौकरी पा जाते हैं, फिर जो कुछ आपने सीखा होता है भूल जाते हैं। क्या इसे ही हम शिक्षा कहते हैं ? क्या आप समझ रहे हैं कि मैं क्या कह रहा हूँ ? क्या हम सब यही नहीं कर रहे हैं ?

लड़कियां बी. ए. एम.ए. जैसी कुछ परीक्षाएं पास कर लेती हैं, विवाह कर लेती हैं, खाना पकाती हैं या कुछ और बन जाती हैं, बच्चों को जन्म देती हैं और इस तरह से अनेक वर्षो में पाई जाने वाली शिक्षा पूर्णतः व्यर्थ हो जाती है हां, यह जरूर जान जाती हैं कि अंग्रेजी कैसे बोली जाती है, वे थोड़ी-बहुत चतुर, सलीकेदार, सुव्यवस्थित हो जाती हैं और अधिक साफ सुथरी रहने लगती हैं, पर बस उतना ही होता है, है न ? किसी तरह लड़के कोई तकनीकी काम पा जाते हैं, क्लर्क बन जाते हैं या किसी तरह शासकीय सेवा में लग जाते है इसके साथ ही सब समाप्त हो जाता है। ऐसा ही होता है न ?

आप देख सकते हैं कि जिसे आप जीना कहते हैं, वह नौकरी पा लेने बच्चे पैदा करने, परिवार का पालन-पोषण करने, समाचार-पत्रों एवं पत्रिकाओं को पढ़ने, बढ़–चढ कर बातें कर सकने और कुशलतापूर्वक वाद-विवाद कर सकने तक सीमित होता है। इसे ही हम शिक्षा कहते हैं-है न ऐसा ? क्या आपने कभी अपने माता-पिता और बडे लोगों को ध्यान से देखा है ? उन्होंने भी परीक्षाएं पास की हैं, वे भी नौकरियां करते हैं और पढ़ना-लिखना जानते हैं। क्या शिक्षा का कुल अभिप्राय इतना है ?
इल्म का मामला कहीं अधिक व्यापक है। इसका इतना ही नहीं कि दुनिया में यह आपको कोई नौकरी दिलाने में सहायक हो, बल्कि यह भी है कि इस दुनिया का सामना करने में आपकी मदद करे। आप जानते हैं कि संसार क्या है। इस संसार में चारों तरफ प्रतिस्पर्धा है। आपको मालूम ही है कि प्रतिस्पर्धा का अर्ध क्या हैः प्रत्येक व्यक्ति केवल अपना ही लाभ देख रहा है, अपने लिए सबसे बढ़िया चीज हथियाने के लिए संघर्षरत है और उसे पाने के लिए वह दूसरे सभी लोगों को एक ओर धकेल देता है। इस दुनियाँ में युद्ध हैं, वर्ग-विभाजन है और आपसी लड़ाई-झगड़े हैं।

इस संसार में हर व्यक्ति अच्छे-से-अच्छा रोजगार पाने के लिए तथा अधिक-से-अधिक ऊपर उठने के लिए प्रयत्न कर रहा है; यदि आप क्लर्क हैं और ऊंचा पद पाने का प्रयत्न कर रहे है, और इसलिए हर समय संघर्षरत रहते है क्या आप यह सब नहीं देखते हैं ? यदि आपके पास एक कार है तो आप उससे भी बड़ी कार चाहते हैं। इस प्रकार यह संघर्ष अनवरत रूप से चलता रहता है, न केवल अपने भीतर बल्कि अपने सभी पड़ोसियों के साथ भी। फिर हम देखते हैं युद्ध जिसमें हत्यायें होती हैं, लोगों का विनाश होता है, जैसा पिछले युद्ध में हुआ जिसमें करोड़ों लोग मारे गए, घायल हुए, अपाहिज बना दिए गए।
यह सारा राजनीतिक संघर्ष हमारा जीवन है।  मरने का भय, जीने का भय, लोग क्या कहेंगे और क्या नहीं कहेंगे इसका भय, न जाने हम किस ओर जा रहे हैं इसका भय नौकरी छूट जाने का भय और धारणाओं का भय, क्या यही सब जीवन असाधारण रूप से जटिल चीज़ नहीं है ? क्या आप जानते हैं कि ‘जटिल’ शब्द का अर्थ है? –बहुत उलझा हुआ, यह इतना सरल नहीं है कि आप इसे तत्काल समझ लें; यह बहुत ही कठिन है., इससे अनेकों मुद्दे जुड़े हैं।

अतः शिक्षा का अर्थ क्या यह नहीं है कि इन सभी समस्याओं का सामना करने के लिए वह आपको समर्थ बनाएं। यह आवश्यक है कि इन सभी समस्याओं का ठीक ढंग से सामना करने के लिए आपको शिक्षित किया जाए। यही शिक्षा है कि न मात्र कुछ परीक्षाएं पास कर लेना कुछ बेहुदा विषयों का-जिनमें आपकी रुचि बिलकुल नहीं है, उसका अध्ययन कर लेना। सम्यक शिक्षा वही है जो विद्यार्थी की इस जीवन का सामना करने में मदद करे, ताकि वह जीवन को समझ सके, उससे हार न मान ले उसके बोझ से दब न जाए, जैसा कि हममें से अधिकांश लोगों के साथ होता है। लोग, विचार, देश, जलवायु, भोजन, लोकमत, यह सभी कुछ लगातार आपको उस खास दिशा में ढकेल रहे हैं, जिसमें कि समाज आपको देखना चाहता है। आपकी शिक्षा ऐसी हो कि वह आपको इस दबाव को समझने के योग्य बनाएं इसे उचित ठहराने की बजाए आप इसे समझें और इससे बाहर निकलें जिससे कि एक व्यक्ति होने के नाते, एक मनुष्य होने के नाते, आप आगे बढ़कर कुछ नया करने में सक्षम हो सकें और केवल परंपरागत ढंग से ही विचार करते न रह जाएं। यही वास्तविक शिक्षा है।

आप जानते है कि हममें से अधिकांश के लिए शिक्षा का अर्थ यह सीखना है कि हम क्या सोचें। आपका समाज आपके माता-पिता, आपका पड़ोसी, आपकी किताब, आपके शिक्षक ये सभी आपको बताते हैं कि आपको क्या सोचना चाहिए ‘क्या सोचना चाहिए’ वाली यांत्रिक प्रणाली को हम शिक्षा कहते हैं और ऐसी शिक्षा आपको केवल यंत्रवत, संवेदनशून्य मतिमंद और असृजनशील बना देती है। किंतु यदि आप यह जानते हैं कि ‘कैसे सोचना चाहिए’-न कि ‘क्या सोचना चाहिए’- तब आप यांन्त्रिक परंपरावादी नहीं होंगे बल्कि जीवंत जीवन मानव होंगे; तब आप महान कांन्त्रिकारी होंगे-अच्छी नौकरी पाने या किसी विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए लोगों की हत्या करने जैसे मूर्खतापूर्ण कार्य करने के अर्थ में। यह बहुत महत्त्वपूर्ण है। लेकिन जब हम विद्यालय में होते हैं तो इन चीज़ों की ओर कभी ध्यान नहीं देते। शिक्षक स्वयं इसे जानते !

 वे तो केवल आपको यही सिखाते हैं कि क्या पढ़ना चाहिए, कैसे पढ़ना चाहिए, वे आपकी अंग्रेजी या गणित सुधारने में व्यस्त रहते हैं। उन्हें तो इन्हीं सब चीजों की चिन्ता रहती है, और फिर पाँच या दस वर्षों के बाद आपको उस जीवन में धकेल दिया जाता है जिसके बारे में आपको कुछ पता नहीं होता है। इन सब चीज़ों के बारे में आपको किसी ने कुछ नहीं बताया है, या बताया भी है तो किसी दिशा में आपको धकेलने के लिए जिसका परिणाम होता है कि आप समाजवादी, कांग्रेसी या कुछ और हो जाते हैं परंतु वे आपको यह नहीं सिखाते, न इस बारे में आपका सहयोग करते हैं कि जीवन की इन समस्याओं को कैसे सोचा-समझा जाए; और हाँ, कुछ देर के लिए इस पर चर्चा कर लेने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इन सारे वर्षों के दौरान बराबर इसकी चर्चा हो, यहीं तो शिक्षा है, है न ? क्योंकि इस प्रकार के विद्यालय में हमें यही बस छोटी-मोटी परीक्षाएं पास कर लें बल्कि इसमें भी आपका सहयोग करना हमारा कार्य है कि जब आप इस स्थान को छोड़कर जाएं तो जीवन का सामना कर सकें, आप एक प्रबुद्ध मानव बन सकें न कि मशीनी इंसान… |

vidyarthivikassansthan
शिक्षा का क्या अर्थ है ?

बोर्ड की परीक्षा में सफलता के सूत्र .

vidyarthivikassansthan
बोर्ड की परीक्षा में सफलता के सूत्र .

बोर्ड के एग्जाम शुरू होने को हैं और अब स्टूडेंट्स के साथ पैरंट्स को भी तनाव में देखा जा सकता है। प्रत्येक सब्जेक्ट के पूरे साल की तैयारी की परख महज तीन घंटे के पेपर में आपके प्रदर्शन पर की जाती है और इसी रिजल्ट के आधार पर भावी करियर की दशा और दिशा भी तय होती है। ऐसे में बखूबी इन तीन घंटों के प्रत्येक पेपर के महत्व को समझा जा सकता है। स्कूल टीचर्स के क्लास नोट्स, अपने बनाए नोट्स, विभिन्न गाइड्स, सैम्पल पेपर्स और इतने महीनों की मेहनत को याद रखते हुए एग्जाम के दौरान आंसर शीट में सफलता पूर्वक संजोना ही सफलता और असफलता की सबसे बड़ी चुनौती कही जा सकती है।

अंग्रेजी

– सरल और शब्दों भाषा का भरसक इस्तेमाल करें।

– भाषा प्रवाह और विचारों को प्रेषित करने की परख करना ही इस पेपर का मुख्य उद्देश्य होता है, इसलिए ग्रैमर की शुद्धता, उपयुक्त शब्दों का प्रयोग, स्पेलिंग की गलतियों से बचना आदि पर अधिक ध्यान होना चाहिए।

– स्लैंग लैंग्वेज और अधूरे शब्दों का प्रयोग किसी भी हालत में न करें।

– फ्लावरी लैंग्वेज और भारी भरकम शब्दों के प्रयोग से एग्जामिनर प्रभावित नहीं होता है, बल्कि स्पेलिंग और वाक्य रचना में गलतियां होने की आशंका बढ़ जाती है।

हिंदी

– लिखावट पठनीय होनी चाहिए और जल्दबाजी की झलक बिल्कुल नहीं मिलनी चाहिए।

– आम बोलचाल की भाषा का इस्तेमाल करने में कोई बुराई नहीं है। मुश्किल शब्दों के बदले आसान शब्द इस्तेमाल कर सकते हैं।

– वाक्यों में एक ही शब्द की बार-बार दोहराने से पढ़ने वाले को अटपटा लग सकता है और यह भी संदेश जाने-अनजाने एग्जामिनर को चला जाता है कि आपके पास शब्द भंडार नहीं है।

– कुछ परीक्षार्थी शब्द संख्या बढ़ाने या उत्तर को लंबा खींचने के चक्कर में शुरुआती वाक्यों को बाद में भी दुबारा लिख देते हैं। इससे नुकसान ज्यादा हो सकता है।

संस्कृत

– वर्तनी पर अत्यंत ध्यान दिया जाना चाहिए अन्यथा जरा सी लापरवाही से अर्थ बदल सकता है।

– लेखन में संधि, समास, लिंग, वाच्य, लकार इत्यादि का उपयुक्त तरीके से इस्तेमाल करें।

– व्याकरण आधारित प्रश्नों को पहले किया जा सकता है। इससे अन्य सवालों के लिए ज्यादा वक्त मिल जाएगा।

मैथ्स

– सवाल को कॉपी पर लिखने के बाद एक बार जरूर चेक करें कि सही लिखा है या नहीं।

– याद रखें कि फॉर्म्यूला और जवाब लिखने भर से पूरे अंक नहीं मिलते हैं।

– प्रत्येक गणितीय सवाल के सामने रफ कैल्कुलेशंस अवश्य दर्शाएं ताकि एग्जामिनर को पता चल सके कि सवाल आपने कैसे हल किया है।

– स्टेवाइज हर सवाल को हल करें। यह नहीं भूलें कि स्टेप के मुताबिक ही अंक देने की मार्किंग स्कीम एग्जामिनर को बोर्ड की ओर से दी जाती है।

– हर हालत में फॉर्म्यूला लिखना न भूलें।

– अंकों की ओवर राइटिंग करने से बचें, बेहतर होगा कि काट कर दोबारा लिख दें।

– अंतिम जवाब के साथ यूनिट का उल्लेख करना नहीं भूलें अन्यथा अंक काटे जा सकते हैं।

– ऑल्टरनेटिव मैथड्स को भी स्वीकार किया जाता है और आनुपातिक आधार पर अंक देने का प्रावधान है।

फिजिक्स

– परिभाषाओं की भाषा को अपने शब्दों में लिखने का प्रयास अर्थ का अनर्थ कर सकता है।

– जहां जरूरी हो साइंटिफिक सिंबल का इस्तेमाल करें।

– न्यूमेरिकल्स हल करने में फॉर्म्यूलों और यूनिट्स का उल्लेख जरूर करें।

– अपनी अवधारणाओं को स्पष्ट लिखें। यह कतई नहीं मानकर चलें कि एग्जामिनर समझ लेगा।

कैमिस्ट्री

– कैमिकल इक्वेशन में बैलेंसिंग की जांच जरूर कर लें।

– न्यूमेरिकल्स हल करने में फॉर्म्यूला जरूर लिखें। इसके भी अंक होते हैं।

– कैमिकल प्रक्रिया के बारे में लिखते समय छोटे-से-छोटा तथ्य भी क्रमानुसार लिखना न भूलें।

– लंबे जवाब न लिखें। बिंदुवार जवाब लिखने से अच्छा प्रभाव पड़ता है।

– जरूरत के अनुसार चिह्नित डायग्राम बनाने चाहिए।

बायॉलजी

– कम अंकों वाले प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में ही निर्देशानुसार ही लिखें और ज्यादा वक्त अधिक जानकारियां देने में लगाने से बचें।

– डायग्राम के साथ कैप्शंस और अलग-अलग हिस्सों के नाम लिखना न भूलें।

– कोशिश करें कि एनसीईआरटी टेक्स्ट बुक्स की परिभाषाओं और भाषा का ज्यादा इस्तेमाल हो।

अकाउंट्स

– गलत अकाउंट या खाते में पोस्टिंग करने से बचें।

– अकाउंट की कैलक्युलेशन मिस्टेक्स से बचें।

– अकाउंट्स की गलत फॉर्मेटिंग नहीं होनी चाहिए।

– गलत और अधूरे विवरण नहीं दें। लेजर अकाउंट, जर्नल और स्टेटमेंट का नाम/विवरण जरूर दें।

– रेश्यो बेस्ड सवालों में यूनिट्स जरूर लिखें। जैसे टर्न ओवर रेश्ओ और प्रोफिटेबिलिटी रेश्यो आदि।

– अकाउंट/स्टेटमेंट एक ही पेज पर पूरा करने की कोशिश करें।

– रफ नोट्स जहां कहे गए हों, जरूर दर्शाएं।

बिजनस स्टडीज़

– कंसेप्ट्स को बेहद सरल भाषा में प्रस्तुत करें। उदाहरण के साथ प्रस्तुत कर सकें तो और बेहतर होगा।

– अगर याद नहीं आ रहे हों, तो बुनियादी बिजनस की समझ के आधार पर भी कई सवालों के जवाब दिए जा सकते हैं।

– याद रखें कि बिंदुवार ढंग से ही जवाब अंकों के मान के मुताबिक लिखें।

हिस्ट्री

– महज चंद शब्दों या पहले वाक्य को पढ़कर जल्दबाजी में सवालों के जवाब लिखना न शुरू करें। पूरे क्वेस्चन पेपर को पढ़कर ही तय करें कि क्या जवाब लिखना है।

– अंकों या शब्दों की सीमा के अनुसार उत्तर लिखें। ज्यादा लंबे उत्तर लिखने से अधिक अंक नहीं मिलने वाले। लंबे उत्तर पॉइंट/छोटे पैराग्राफ बनाकर लिखें तो ज्यादा अच्छा होगा।

– जहां जरूरी हो कंटेम्पररी हिस्ट्री के उदाहरण देकर समझाने का प्रयास कर सकते हैं।

– ऐनालिटिकल (विश्लेष्णात्मक) उत्तर देने का प्रयत्न करें।

इकनॉमिक्स

– प्रयास करें कि हैल्प बुक्स या गाइड्स की जगह एनसीईआरटी टेक्स्ट बुक की भाषा का प्रयोग करें।

– यथासंभव लेबल्ड डायग्राम भी उत्तरों तार्किक बनाने के लिए साथ में बनाएं।

– फॉर्म्यूलों को न्यूमेरिकल शुरू करने से पहले लिखना नहीं भूलें।

– अधिक अंकों के सवालों के जवाब लिखने में छोटे छोटे पैराग्राफ्स में अपनी बातों को रखें।

– अस्पष्ट या अधूरे तथ्यों को लिखने से बेवजह अपना इम्प्रेशन खराब कर सकते हैं। ऐसे में नहीं लिखना ही बेहतर होगा।

(नोट- सोश्यॉलजी, जिऑग्रफ़ी, सायकॉलजी, फिजिकल एजुकेशन आदि पेपर्स में भी ऊपर बताई गई सावधानियां बरतें।)

एग्जामिनेशन हॉल के लिए जरूरी टिप्स:

– टाइम मैनेजमेंट में परेशानी नहीं हो, इसलिए आपके पास घड़ी जरूर होनी चाहिए।

– समूचे क्वेस्चन पेपर को पढ़ें। पढ़ने के साथ ही जवाब लिखने की रूपरेखा भी दिमाग में बनाते जाएं, तो बाद में आसानी होगी।

– जरूरी नहीं कि पेपर में दिए गए सवालों के क्रम में ही जवाब लिखे जाएं। जिस सवाल का जवाब आपको सबसे अच्छी तरह से आता हो बेशक वहीं से जवाब लिखने की शुरुआत करें। इससे एग्जामिनर पर अच्छा शुरुआती प्रभाव पड़ता है और अच्छे अंक देने में उसके हाथ रुकते नहीं हैं।

– ध्यान रखें कि एक खंड के सवालों के जवाब एक साथ हों, उन्हें दूसरे खंड के साथ नहीं मिलाएं।

– सही प्रश्न संख्या जवाब लेखन से पहले लिखने की आदत डालें।

– ज्यादा अंकों वाले सवालों और खंड को पहले हल करने से बचे हुए सवालों के लिए ज्यादा वक्त बचा सकते हैं।

– भरसक कोशिश करें कि सवालों के अंकों के मुताबिक बिंदुवार ढंग से जवाब लिखे जाएं। इन बिंदुओं के वाक्य अधूरे नहीं होने चाहिए।

– मैथ्स, फिजिक्स, अकाउंट्स सरीखे क्वेस्चन पेपर्स में स्टेप्स पर आधारित मार्किंग होती है। इसलिए जल्दबाजी में स्टेप्स छोड़ने की भूल न करें।

– एग्जामिनर का ध्यान मुख्य बिंदुओं की ओर आकर्षित करने के लिए सब हैडिंग्स और महत्वपूर्ण तथ्यों को रेखांकित करना न भूलें।

– जवाब को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए विद्वानों/विशेषज्ञों आदि के विचार देने में हर्ज नहीं है।

– निर्धारित शब्द सीमा में उत्तर सीमित रखने की कोशिश करें। किसी वजह से ज्यादा शब्द हो भी जाते हैं तो उनके अंक नहीं काटे जाते।

– भाषा के प्रश्न पत्र में वर्तनी और व्याकरण की गलतियों के अंक अवश्य काटे जाते हैं, जबकि शेष विषयों में तथ्यों की गलतियों के अंक काटे जाते हैं।

– बोर्ड एग्जाम के कई सवाल कभी-कभी बहुत उलझाने वाले होते हैं, बेशक अधिक समय लगाते हुए ध्यानपूर्वक उन्हें समझते हुए उत्तर लिखें।

– तुलना करने पर आधारित सवालों में टेबल बनाकर अंतर स्पष्ट करना ज्यादा अच्छा माना जाएगा।

– अगर किसी सवाल में सिर्फ दो ही बिंदु लिखने को कहा गया है तो शुरू में श्रेष्ट दो बिंदुओं को ही लिखें, तीसरे बिंदु पर गौर नहीं किया जाएगा।

– डायग्राम सिर्फ पेंसिल से बनाएं।

– अगर आपने किसी जवाब को दोबारा लिखा है, तो पहले लिखे हुए जवाब को काटना न भूलें अन्यथा जो पहले का उत्तर होगा उसके ही अंक शामिल किए जाएंगे दोबारा लिखे गए जवाब को नहीं माना जाएगा।

– कोई भी सवाल छोड़ें नहीं। अगर ज्यादा नहीं भी आता हो, तो जितना पता है उतना अवश्य लिख कर आएं।

– लिखावट इतनी स्पष्ट अवश्य हो कि एग्जामिनर को पढ़ने में ज्यादा माथापच्ची नहीं करनी पड़े अन्यथा नहीं समझ आने पर नंबर मिलने मुश्किल होंगे।

– एग्जाम खत्म होने से पहले कम-से-कम 15 मिनट का वक्त जरूर आपके पास बचना चाहिए ताकि पूरी आंसर शीट को दोबारा पढ़ सकें और गलतियों को वक्त रहते सुधार सकें।

– अंत में एग्जामिनेशन हॉल छोड़ने से पहले चेक कर लें कि आपने कोई सवाल छोड़ा तो नहीं है?

अगर नर्वस या ब्लैंक हो जाएं:

– बिल्कुल घबराएं नहीं और पानी पीकर एक मिनट का ब्रेक लें। इसके बाद समूची ऊर्जा और कॉन्संट्रेशन के साथ दुबारा सोचें। ऐसा कभी-कभी ज्यादा तनाव अथवा ठीक से नहीं सोने की वजह से हो जाता है।

– शांति से याद करने की कोशिश करें कि प्रश्न किस चैप्टर से पूछा गया है और आपने इस बारे में क्या पढ़ा था। कॉन्सेप्ट्स याद आने लगेंगे और आप उन्हें लिखते जाएं।

– बेशक कम महत्व के बिंदुओं को भी आप ऐसे में लिखते चलें।

– ज्यादा समय एक सवाल पर न लगाते हुए थोड़ी जगह बाद में लिखने के लिए छोड़कर अगले सवाल पर वक्त दें। बाद में याद आने पर आप नए बिंदु लिख सकते हैं।

– विश्वास रखें कि दो-तीन सवालों के बाद ही आपका आत्मविश्वास वापस आने लगेगा।

पेपर पढ़ने के 15 मिनट्स का कैसे सदुपयोग करें:

– सवालों और निर्देशों को अच्छी तरह से धीरज से पढ़कर समझ लें।

– वैकल्पिक सवालों को भी इसी क्रम में छांट लें कि किनके जवाब देने हैं और किन्हें छोड़ना है। बेशक प्रश्न पत्र पर ही चुने गए सवालों पर निशान लगा सकते हैं।

– इसी दौरान तय कर लें कि किन सवालों के जवाब पहले लिखने हैं। सवालों को समझने में दिक्कत हो तो दोबारा पढ़ें।

जवाब लिखने का बेहतर तरीका:

इसमें कोई शक नहीं कि सुंदर, साफ और स्पष्ट लिखावट का अच्छा शुरुआती असर एग्जामिनर पर पड़ता है। पहले इम्प्रेशन के प्रभाव के कारण कुछ अधिक अंक देने में उसे परेशानी नहीं होती है। इसलिए-

– उत्तर पुस्तिका के प्रत्येक पृष्ठ के दोनों और हाशिये छोड़कर लिखना शुरू करें ताकि एग्जामिनर को अंक देने और अपने कॉमेंट्स देने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।

– अच्छी राइटिंग के लिए सिर्फ अक्षरों को पूरा और स्पष्ट लिखने की जरूरत होती है।

– नीले पेन का ही लिखने में प्रयोग करें।

– प्रत्येक जवाब के बाद कम-से-कम दो लाइनें अवश्य छोड़ें।

– भरसक प्रयास करें कि काट-पीट कम-से-कम हो।

– ओवर राइटिंग से बचें।

– जवाबों के मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करें।

– अगर किसी जवाब को पूरी तरह से काटकर दुबारा लिख रहे हैं तो एग्जामिनर के लिए इस आशय का नोट साथ में अवश्य लिख दें ताकि उसे तलाश करने में परेशानी न हो।

– अलग-अलग रंगों का इस्तेमाल न करें।

आम गलतियां:

– लापरवाही के कारण कम-से-कम दो पेन और जिऑमेट्री का बॉक्स साथ लेकर नहीं जाने की प्रवृति।

– एक्स्ट्रा शीट पर नाम, रोल नंबर और सब्जेक्ट आदि नहीं लिखने की लापरवाही।

– गलत टायमिंग या जरूरत से ज्यादा लिखने के चक्कर में वक्त की कमी होना और कुछ प्रश्नों का छूटना।

– दूसरों को बताने या पूछने का रिस्क लेना और वक्त बर्बाद करना।

– लालच में पड़कर नकल करने की कोशिश।

– बेतरतीब और अतार्किक तरीके से जवाब की प्रस्तुति।

– ज्यादा छोटे अक्षर या बहुत बडे़ अक्षरों का प्रयोग।

परीक्षा से पहले के 24 घंटे:

– इस दौरान अधिक तनाव या ज्यादा पढ़ाई के दबाव में आने से बचें।

– सिर्फ अपने नोट्स/अहम सवालों के रिविजन तक ही सीमित रहे।

– कुछ नया पढ़ने की कोशिश न करें। इससे फायदा कम, नुकसान ज्यादा हो सकता है।

– थोड़ा-बहुत मनोरंजन और सैर जरूर करें ताकि ताजगी बरकरार रहे।

– सोशल साइट्स पर मनोरंजन के नाम पर वक्त न बिताएं।

– झगड़े-लड़ाई या किसी दूसरे तरह के मानसिक तनाव से बचें।

– शाम के वक्त कुछ हल्का खा लें और जल्दी सो जाएं ताकि पूरी नींद ले सकें।

– सुबह जल्दी उठकर एक बार अहम अंशों की ठीक से दुहरा लें।

– वक्त रहते तैयार हों और नाश्ता कर वक्त से पहले परीक्षा हॉल में पहुंचें। भागते-दौड़ते पहुंचने पर बेकार का तनाव हो सकता है और उसका असर पेपर पर पड़ सकता है। इतना ही नहीं देरी होने पर लिखने का बहुमूल्य वक्त गवां सकते हैं।

vidyarthivikassansthan.
vidyarthivikassansthan.