आदर्श विद्यार्थी की पहचान

 

vidyarthi vikas sansthan
आदर्श विद्यार्थी की पहचान

बच्चा सहज, सरल, निर्दोष और भगवान का प्यारा होता है। बच्चों में महान होने के कितने ही गुण बचपन में ही नज़र आते हैं। जिससे बच्चे को आदर्श बालक कहा जा सकता है। ये गुण निम्नलिखित हैं-

  1. वह शांत स्वभाव होता हैः जब सारी बातें उसके प्रतिकूल हो जाती हैं या सभी निर्णय उसके विपक्ष में हो जाते हैं, तब भी वह क्रोधित नहीं होता।

  1. वह उत्साही होता हैः जो कुछ वह करता है, उसे अपनी योग्यता के अनुसार उत्तम से उत्तम रूप में करता है। असफलता का भय उसे नहीं सताता।

  1. वह सत्यनिष्ठ होता हैः सत्य बोलने में वह कभी भय नहीं करता। उदारतावश कटु व अप्रिय सत्य भी नहीं कहता।

  1. वह धैर्यशील होता हैः वह अपने सतकर्म में दृढ़ रहता है। अपने सतकर्मों का फल देखने के लिए भले उसे लम्बे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़े, फिर भी वह धैर्य नहीं छोड़ता, निरूत्साहित नहीं होता है। अपने कर्म में डटा रहता है।

  1. वह सहनशील होता हैः सहन करे वह संत इस कहावत के अनुसार वह सभी दुःखों को सहन करता है। परंतु कभी इस विषय में शिकायत नहीं करता है।

  1. वह अध्यवसायी होता हैः वह अपने कार्य में कभी लापरवाही नहीं करता। इस कारण उसको वह कार्य भले ही लम्बे समय तक जारी रखना पड़े तो भी वह पीछे नहीं हटता।

  1. वह समचित्त होता हैः वह सफलता और विफलता दोनों अवस्थाओं में समता बनाये रखता है।

  1. वह साहसी होता हैः सन्मार्ग पर चलने में, लोक-कल्याण के कार्य करने में, धर्म का अनुसरण व पालन करने में, माता-पिता व गुरूजनों की सेवा करने व आज्ञा मानने में कितनी भी विघ्न-बाधाएँ क्यों न आयें, वह जरा-सा भी हताश नहीं होता, वरन् दृढ़ता व साहस से आगे बढ़ता है।

  1. वह आनन्दी होता हैः वह अनुकूल-प्रतिकूल परिस्थितियों में प्रसन्न रहता है।

  1. वह विनयी होता हैः वह अपनी शारीरिक-मानसिक श्रेष्ठता एवं किसी प्रकार की उत्कृष्ट सफलता पर कभी गर्व नहीं करता और न दूसरों को अपने से हीन या तुच्छ समझता है।विद्या ददाति विनयम्।

  1. वह स्वाध्यायी होता हैः वह संयम, सेवा, सदाचार व ज्ञान प्रदान करने वाले उत्कृष्ट सदग्रन्थों तथा अपनी कक्षा के पाठ्यपुस्तकों का अध्ययन करने में ही रूचि रखता है और उसी में अपना उचित समय लगाता है, न कि व्यर्थ की पुस्तकों में जो कि उसे इन सदगुणों से हीन करने वाले हों।

  1. वह उदार होता हैः वह दूसरों के गुणों की प्रशंसा करता है, दूसरों को सफलता प्राप्त करने में यथाशक्ति सहायता देने के लिए बराबर तत्पर रहता है तथा उनकी सफलता में खुशियाँ मनाता है। वह दूसरों की कमियों को नज़रंदाज करता है।

  1. वह गुणग्राही होता हैः वह मधुमक्खी की तरह मधुसंचय की वृत्तिवाला होता है। जैसे मधुमक्खी विभिन्न प्रकार के फूलों के रस को लेकर अमृततुल्य शहद का निर्माण करती है, वैसे ही आदर्श बालक श्रेष्ठ पुरुषों, श्रेष्ठ ग्रन्थों व अच्छे मित्रों से उनके अच्छे गुणों को चुरा लेता है और उनके दोषों को छोड़ देता है।

  1. वह ईमानदार और आज्ञाकारी होता हैः वह जानता है कि ईमानदारी ही सर्वोत्तम नीति है। माता-पिता और गुरू के स्व-परकल्याणकारी उपदेशों को वह मानता है। वह जानता है कि बड़ों के आज्ञापालन से आशीर्वाद मिलता है और आशीर्वाद से जीवन में बल मिलता है। ध्यान रहेः दूसरों के आशीर्वाद व शुभकामनाएँ सदैव हमारे साथ रहते हैं।

  1. वह एक सच्चा मित्र होता हैः वह विश्वसनीय, स्वार्थरहित प्रेम देनेवाला, अपने मित्रों को सही रास्ता दिखाने वाला तथा मुश्किलों में मित्रों का पूरा साथ देने वाला मित्र होता है।

 

 

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